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स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गांधी इतिहास नोट्स: सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए | Mahatma Gandhi in Freedom Struggle Important History Notes : for all Competitive Exams

 

स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गांधी इतिहास नोट्स: सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए | Mahatma Gandhi in Freedom Struggle Important History Notes : for all Competitive Exams






Pustak Ka Naam / Name of Book : स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गांधी इतिहास नोट्स / Mahatma Gandhi in Freedom Struggle Important History Notes 

Pustak Ki Bhasha / Language of Book : हिंदी / Hindi

Pustak Ka Akar / Size of Ebook : 270 KB

Pustak Mein Kul Prashth / Total pages in ebook : 09

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Hope This Indian Geography Important Notes  will Step up you to Succeed / आशा करते हैं भारतीय भूगोल महत्वपूर्ण नोट्स आपके कदम सफलता की ओर ले जायगी

Mahatma Gandhi in Freedom Struggle Important History Notes In Hindi PDF Download

 स्वतंत्रता संघर्ष में महात्मा गांधी
 (इतिहास नोट्स)


महात्मा गाँधी:-

माता- पुतलीबाई 

पिता- करमचन्द गाँधी 

पत्नी- कस्तूरबा गाँधी 

बेटे- हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास 

v 13 साल की उम्र में उनका विवाह कस्तूरबा मरवनजी से  हुआ। 

v प्रतिदिन करीब पैदल चलते थे यानी जिन्दगी भर  18 किमी  जितना चले उसमें पृथ्वी के दो चक्कर लग जाते। 

v 5 बार नोबेल शांति पुरुस्कार के लिए नामित किया गया |

v 4 महाद्वीप, 12 मुल्कों में नागरिक अधिकारों से जुड़े आन्दोलनों का श्रेय उन्हें जाता है। 

v ब्रिटेन ने उनकी मृत्यु के 21 वर्ष पश्चात उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया ।

 

गाधाजी के प्राराम्भक सत्याग्रह (1917)

चंपारण सत्याग्रह:- 

उस समय किसानों को एक अनुबंध 3/20 वें (20 कट्ठा में 3 कट्ठा) भाग पर नील की खेती करने के लिए बाध्य किया गया इसे तीनकठिया पद्धति कहते हैं। 


किसान इससे छुटकारा चाहते थे इसके लिए राजकुमार शुक्ल ने गाँधी जी को आमंत्रित किया । तब गाँधी जी ने सत्याग्रह शुरु किया, सरकार झुकी जाँच के आयोग का गठन किया गया तथा इस पद्धति को समाप्त कर वसूली का 25% हिस्सा किसानों को वापस किया गया। 

गाँधी जी के कुशल नेतृत्व से प्रभावित होकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने उन्हें महात्मा की उपाधि दी। 


चंपारण सत्याग्रह:- 

v सत्याग्रह की प्रेरणा गाँधी जी ने डेविड थोरो के निबंध डिसओबिडीएन्स से ली थी 

v गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग दक्षिण अफ्रीका में किया था। 

v 9 जनवरी 1915, गाँधी जी द. अफ्रीका से भारत आये राजनीतिक गुरु-गाँधी जी के गुरु गोपाल कृष्ण गोखले थे 


भारत में प्रथम सत्याग्रहः-

चम्पारण (विहार)

v गोखले जी की सलाह पर (1915-1916) 2 वर्ष गाँधी जी ने भारत भ्रमण किया।

v उसके बाद 1917-1918 के बीच तीन प्रारम्भिक आन्दोलनों का नेतृत्व किया।


चम्पारण सत्यागृह के बाद:-

खेड़ा सत्याग्रह:- 

1918 ई० में गुजरात के खेड़ा जिले में भीषण अकाल पड़ा। बावजूद इसके सरकार ने मालगुजारी प्रक्रिया बन्द नहीं की अपितु 23% और वसूली बढ़ा दी। जबकि राजस्व व्यवस्था के अनुसार यदि फसल का उत्पादन कुल उत्पादन के 1/4 से कम हो तो किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ कर देना चाहिए। 


इस पर गांधी जी ने घोषणा की यदि सरकार गरीब किसानों का कर्ज माफ कर दे तो सक्षम किसान स्वयं कर दे देगें। 

सरकार ने गुप्त रूप से अपने अधिकारियों से कहा कि जो किसान सक्षम हैं उन्हीं से कर लिया जाये।

 

अहमदाबाद मिल हड़ताल (1918):-

यह आन्दोलन भारतीय कपड़ा मिल मालिकों के विरोध में था। यहाँ पर मजदूरों के बोनस को लेकर गाँधी जी ने भूख हड़ताल करने को कहा तथा स्वयं भी भूख हड़ताल की। यह उनकी पहली भूख हड़ताल थी। इसके फलस्वरुप मिल मालिक समझौते को तैयार हो गये। इस मामले की एक ट्रिब्यूनल को सौंपा गया जिसने मजदूरों का पक्ष लेते हुए 35% बोनस देने का फैसला सुनाया।

 

खिलाफत आन्दोलन (1919-1924):-

उददेश्य:- तुर्की में खलीफा के पद की पुनः स्थापना करने के लिए अंग्रेजों पर दबाब बनाना । 

रोलेट बिल, जलियांवाला बाग के फलस्वरुप अखिल भारतीय खिलाफत कमेटी ने खिलाफत आन्दोलन का संगठन किया । गांधी जी के प्रभाव से खिलाफत तथा असहयोग आन्दोलन एकमत हो गये।

 

खलीफा पद की समाप्ति:- 

राष्ट्रीयतावादी मुस्तफा कमाल ने 3 मार्च 1924 को समाप्त कर दिया । 

कारण:- गाँधी जी धर्म के ऊपरी आवरण को दरकिनार 

न करते हुए हिन्दू मुस्लिम एकता के आधार को पहचाना उनके बीच आपसी झगड़ा था लेकिन सभ्यता मूलक एकता भी थी।

 

असहयोग आन्दोलन (1920):-

श्री चिमनलाल सितलबाड के अनुसार- 

"वायसराय लॉर्ड राडिंग कुर्सी पर हताश बैठ गया और अपने दोनो हाथों सिर थामकर फूट पड़ा।” 

इस आन्दोलन ने ब्रिटिश राज्य की जड़ों पर प्रहार किया। 

उद्देश्य:- ब्रिटिश भारत की राजनीतिक आर्थिक तथा सामजिक संस्था का बहिष्कार करना और शासन की मशीनरी को बिल्कुल ठप्प करना। आरम्भ:- 1920 में राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन से।

 

असहयोग आन्दोलन को सफल बनाने हेतु किये गये प्रयास:-

v सरकारी उपाधिया, वैतनिक तथा अवैतनिक पदों का त्याग

v सरकारी उत्सवों अथता दरबारों में सम्मिलित न होना । 

v सरकारी एवं अर्द्धसरकारी स्कूलों का त्याग । 

v 919 के अधिनियम के अंतर्गत होने वाले चुनावों का बहिष्कार । 

v सरकारी अदालतों का बहिष्कार 

v विदेशी माल का बहिष्कार


आन्दोलन समाप्ति एवं उसका कारण:- गाँधी जी ने कहा था आन्दोलन पूरी तरह अहिंसक होना चाहिए किन्तु फरवरी 1922 में चौरी-चौरा काण्ठ की वजह से इसे स्थगित कर दिया गया

चौरी चौरा कांड:-

चौरी चौरा, उत्तर प्रदेश में (4 फरवरी 1922) गोरखपुर के पास एक कस्बा है। 

यहाँ 4 फरवरी 1922 में भारतीय आन्दोलनकारियों ने ब्रिटिश सरकार की एक पुलिस चौकी को आग लगा दी जिससे उसमें छुपे हुए 22 पुलिस कर्मी जिन्दा जला कर गये । इस घटना को चौरी चौरा कांड के नाम से जाना जाता है।


असहयोग आन्दोलन के पश्चात:-

नेहरू रिपोर्ट (1928):-

लार्ड बर्कनहेड (भारत सचिव) ने राष्ट्र नेतृत्व को एक ऐसा संविधान बनाने की चुनौती थी जिसे सभी स्वीकार करें। 

v 1927 के मद्रास अधिवेशन में यह तय किया गया कि अन्य राजनीतिक दलों की सहमति से संविधान का मसौदा बनाया जाये। 

v 19 मई 1928 को अ. अंसारी की अध्यक्षता में सम्मेलन हुआ इसमें मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी जिसे संविधान का मसौदा तैयार करने का कार्य सौंपा। 

v नेहरु समिति ने 28 अगस्त 1928 को अपनी रिपोर्ट सौंपी इसे लखनऊ में आयोजित सभा में स्वीकार कर लिया गया। 


नेहरू समिति रिपोर्ट की सिफ़ारिशें:- 

v भारत को डोमिनियन स्टेट का दर्जा दिया जाये। 

v साम्प्रदायिक निर्वाचन प्रणाली की समाप्त किया जाये। 

v संयुक्त निर्वाचन प्रणाली अपनायी जाये

v भाषायी आधार प्रान्तों का गठन हो। 

v भारत में धर्म निरपेक्ष राज्य होगा किन्तु अल्पसंख्यकों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक हितों का पूर्ण संरक्षण होगा। 

v केन्द्र एवं प्रान्त में संघीय आधार पर शक्ति विभाजन। 

v भारत में उच्चतम न्यायालय की स्थापना। 

v संघ लोक सेवा आयोग की स्थापना।

 

साइमन कमीशन:-

1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा के लिए इस आयोग का गठन 1927 में किया गया । 

अध्यक्ष- सर जान साइमन थे । 

विरोध का कारण:- इस आयोग मे रक भी भारतीय 

नही था इसलिए भारतीयों को लगता था कि इसकी रिपोर्ट में पक्षपात होगा और अंग्रेजों के हितों का ध्यान रखा जायेगा।


बहिष्कार का निर्णय:-

काँग्रेस के मद्रास अधिवेशन (1927) में एम. ए. अंसारी की अध्यक्षता में।


भारत आगमन:-

3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन (बम्बई) भारत पहुंचा|


साइमन कमीशन से जुड़े कुछ तथ्य:- 

v जब लाहौर लाठी चार्ज में लाला लाजपत राय घायल हुए तो उन्होने कहा:- "मेरे ऊपर लाठियों से किया एक-एक वार अंग्रेज शासन की ताबूत की आखिरी कील साबित होगी |”  

v 1928 से 1929 के बीच कमीशन दो बार भारत आया और मई 1930 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर लन्दन में आयोजित गोलमेज सम्मेलन पर विचार होना था

 

साइमन कमीशन की प्रमुख सिफारिशें:- 

v प्रान्तो में द्वैध शासन ख़त्म हो |

v अखिल भारतीय संघ के विचारों को ना माना जाऐ |

v वर्मा को ब्रिटिश भारत से अलग किया जाऐउसका अलग संविधान हो |

 

दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह):- 

गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को साबरमती आश्रम से 78 अनुयायियों के साथ 24 दिनों की पद यात्रा की व 5 अप्रैल को दांडी पहुँचकर 6 अप्रैल को नमक का कानून तोड़ा। 

सुभाष चन्द्र बोष ने इसकी तुलना नेपोलियन के पेरिस मार्च व मुसोलिन के रोम मार्च से की। 

धरसना में नमक सत्याग्रह का नेतृत्व सरोजिनी नायडू, इमाम साहब मणिलाल (गांधी जी के बेटे) ने किया । 

उत्तर पूर्व में:- इस आन्दोलन का नेतृत्व 13 वर्षीय नागा महिला ने किया जवाहर लाल नेहरू ने इन्हेंरानी" की उपाधि दी

"इन्हें नागालैण्ड की जॉन ऑफ आर्क भी कहा जाता है।"


गोलमेज सम्मेल:-  

साइमन कमीशन की रिपोर्ट पर विचार विमर्श के लिए 1930 में लन्दन में प्रथम गोलमेज सम्मेलन हुआ। 

सदस्य- 89 सदस्यों ने भाग लिया किन्तु काँग्रेस ने नहीं।


गांधी इरविन समझौता:- 

ब्रिटिश राजनीतिज्ञ काँग्रेस व गांधी जी का साथ चाहते थे इसी के चलते गांधी जी और वायसराय के बीच (वायसराय-इरविन) समझौता हुआ |


गांधी इरविन समझौते का उद्देश्य:- 

इसके तहत कांग्रेस की ओर से द्वितीय गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने तथा सविनय अवज्ञा आन्दोलन में चल बन्द करने की बात मान ली गयी।


द्वितीय गोलमेज सम्मेलन:-

1931 में हुआ जिसमें गांधी जी ने कांग्रेस के सदस्य के रूप में भाग लिया लेकिन सांप्रदायिक समस्या के विवाद के कारण असफल रहा|


सविनय अवज्ञा आन्दोलन 1930, 6 अप्रैल:-  

विवरण- ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं मुख्य रुप से गांधी जी के नेतृत्व में चलाया गया 

कारण:- यंग इंडिया (समाचार पत्र) में लेख द्वारा सरकार 

से 11 सूत्री मांगे की और उनके माँगे जाने पर सत्याग्रह की चर्चा बंद करने को कहा व 31 जनवरी 1930 तक का समय दिया। 

सरकार ने मांगे नहीं मानी तब सविनय अवज्ञा आन्दोलन शुरू किया गया

 

प्रमुख कार्यक्रम:-

नमक कानून तोड़ना, कर भुगतान न करना , विदेशी बहिष्कार, सरकारी सेवाओं का त्याग आदि।


सविनय अवज्ञा आन्दोलन के उद्देश्य:- 

कुछ बिशिष्ट प्रकार के गैर कानूनी कार्य सामूहिक रूप से करके ब्रिटिश सरकार को झुका देना । 

प्रभाव:- ब्रिटिश सरकार ने आन्दोलन को दबाने के लिए सख्त कदम उठाये और गांधी जी समेत अनेक नेताओं को जेल में डाल दिया।


भारत छोड़ो आन्दोलन 9 अगस्त 1942:-

विवरण:- भारत को जल्दी आजादी दिलाने के लिए महात्मा गांधी द्वारा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध एक बड़ा फैसला था। 

 

मूलमंत्र:- "करो या मरो "

परिणाम:-

यह आन्दोलन भारत को स्वतन्त्र भले न करवा पाया हो लेकिन इसका दूरगामी सुखदायी रहा। इसलिए इसे-

"भारत की स्वाधीनता के लिए किया जाने वाला अन्तिम महा प्रयासकहा गया। 

माउण्टबेटेन की घोषणा:- लार्ड बावेल के स्थान पर लार्ड माउण्टबेटन को फरवरी 1947 में भारत का वायसराय नियुक्त किया गया तब उसने ऐलान कर दिया कि ब्रिटिश भारत को स्वतंत्रता दे दी जायेगी लेकिन उसका विभाजन भी होगा।



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One Quotation / एक उद्धरण

“If you haven't the strength to impose your own terms upon life, you must accept the terms it offers you.”


‐ T S Eliot

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“यदि आप अपने जीवन को अपनी मर्जी के अनुसार नहीं चला पाते, तो आपको अपनी परिस्थितियों को अवश्य ही स्वीकार कर लेना चाहिए।”

‐ टी एस एलियट

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